Saturday, June 4, 2016

[gita-talk] PLEASE GUIDE ME - regarding GURU

 



Please Guide Me

Friends, Pranaam !  I am in search of a sadguru that is alive,  and is like Swami Ramsukhdasji.  If you are aware of such a Guru, then please guide me.  I will be most grateful

HINDI
मार्गदर्शन करें

मित्रों प्रणाम मुझे आदरणीय रामसुखदासजी की तरह किसी जीवित सदगुरु को खोजना है अगर आप कैसे किसी को जानकारी है तो मेरा मार्गदर्शन करें आभारी बना रहूंगा

Vivek N
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ShriHari 

Namasteji,  You must read Swamiji's book in english.  It will be a good guide in your pursuit.    


or HINDI 




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श्री Vivek N के प्रति :
आप 'जीवित' सद्गुरु की कल्पना करके जिस 'मल-मूत्र बनानेवाली मशीन' (भौतिक शरीर) को खोज रहे हैं, महान गलती कर रहे हैं। यदि वह (भौतिक शरीर) मिल भी गया तो जिस दिन प्राण उससे विदा होने क्या आप अपने उस 'तथाकथित' सद्गुरुको जलायेंगे, या मिट्टीमें गाड़ेंगे या पशु-पक्षियोंको खिलायेंगे? बताइयेगा। 

भैया, गुरु (आपका अपना विवेक) न जन्मता है और न ही मरता है।  अपने अंदर सोये विवेकका आदर कीजिये। 

भौतिक शरीरका नाम विवेक होनेसे कोई विवेकशील नहीं हो जाता।

श्रद्धेय स्वामीजीका भौतिक शरीर अब नहीं रहा तो क्या वे भी नहीं रहे? यदि इस समय वे 'जीवित' नहीं हैं तो इस मंचमें 28,000 साधक क्या शून्यमें सरकसी कलाबाजी कर रहे हैं?

सविनय,
साधक  

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जिस दिन आपको वैसा गुरु (जैसा कि आप खोज रहे हैं) मिल जाय, 
साधकको (इस मंचके माध्यमसे) अवश्य बताइयेगा।
 
जब तक आप स्वयं नहीं स्वीकार करते कि जिसकी आप खोज कर 
रहे हैं वह अनादि कालसे आपमें ही है (गीता ने इस ओर इशारा भी 
किया है, यह बताकर कि आप ही अपने मित्र हैं और आप ही अपने 
शत्रु हैं, कोई दूसरा नहीं), बाहर आप चाहे जितनी खोज कर लें आप 
रीते ही रहेंगे क्योंकि बाहर वह है ही नहीं। 

सत्य कटु होता है पर कहा ही जाता है। तनिक विचार कीजिये :
इस मंचमें लगभग 28,000 साधक हैं जो श्रद्धेय स्वामीजीको मानते हैं 
तो क्या मानते हैं? क्या उन्हें 'गुरु' (जो उन्हें असतके अंधकारसे सतके 
प्रकाशमें ले गया) स्वीकार करते हैं? स्वयं ही सोचें : क्या हमने असत 
का त्याग कर दिया है? क्या भोग और संग्रहसे हम मुक्त हैं? क्या हम 
हर क्षण मानव-जीवनके एकमात्र उद्देश्यके प्रति जागरूक रहते हैं?
ऐसे और भी अनेक प्रश्न हैं। 
यदि इन प्रश्नों में से एक का भी उत्तर ''नहीं''में है तो हमने केवल कहने
के लिये ही स्वामीजीको ''गुरु'' माना, वास्तवमें स्वीकार नहीं किया। 

जिस दिन संसारमें अपने मनका (जैसा आप चाहते हैं) गुरु खोज-खोज
कर थक जायेंगे और बाहर खोजना बंद हो जायगा उसी क्षण अनुभव 
होगा कि ''अटक'' तो अपने अंदर ही थी जो गुरु मिलनेमें रोक रही थी। 
जानते हैं वह अटक क्या है? वह अटक है - सुनना या/और पढ़ना सबकी 
किन्तु मन, वाणी और इंद्रियोंसे करना केवल 'अपने' मनकी। 

श्रद्धेय स्वामीजीने कहा है : 'यह हो जाय और यह नहीं हो', इसको ही 
छोड़ना है। छोड़कर देखिये तो सही। यह मत सोचिये कि 'गुरु' छुड़ा 
देगा। छोड़नी तो आपको ही होगी। फिर पता लगेगा कि परमात्माकी 
व्यवस्थामें अनगिनत 'गुरु' आपके आस-पास ही हैं जैसे दत्तात्रेयजी ने 
उनमेंसे चौबीस सबको बता भी दिये लेकिन वे तब ही काम करेंगे जब 
'अपने मनकी हो जाय' छोड़ देंगे इसके पहले होगी ही नहीं। 
अस्तु। 
सविनय,
साधक   

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Dear Sir, 
If you can devote yourself to the tehlivig god, who is the meeting of the pole, star sun and the moon, you may not need a human Guru. You can read the rest from human Gurus to guide you. How can we get someone like Rama sukhadevji now?
Hari Malla

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Namaste
Just Seek whole heartedly. When YOU are ready your guru will come. 
You can read Autobiography of a Yogi By Paramhans Yogananda. 
May you be successful in your quest in this life only. 
 
Shobha Mathur 

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Dear Sadhak...
The Ishwara is All pervading Self.in the Age of Kali Sadguru is a Rare  occurrence.. so difficult to find..my sincere advice is Read 
1.the syntheses of Yoga by Sri Aurobino..
2.pantjalYog Pardip gita press..
You will find All your answers and also the True Sadguru...
Parnaam
Sitaram..ramram
Sincerely
Kuldip suri..

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Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
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