Tuesday, December 15, 2015

[gita-talk] भोगबुद्धि

 

भोगबुद्धि
28 नवंबर 2015 के सन्देशमें कहा है : भगवान् ने चौथे अध्यायके इक्कीसवें श्लोकमें शरीर-निर्वाह अर्थात् भोगोंमें भोगबुद्धि न होनेके लिये सावधान किया है।  
यह भोगबुद्धि क्या होती है? 
चौथे अध्यायके इक्कीसवें श्लोकमें भोगबुद्धिको वैसे नहीं समझाया गया है जैसे कि व्यवसायात्मिका (निश्चयात्मिका) बुद्धिको दूसरे अध्यायके इकतालीसवें श्लोकमें समझाया गया है (साधक-संजीवनी पृष्ठ 98)।  
कृपया समझाइयेगा कि यह भोगबुद्धि कैसी होती है? भोगबुद्धिकी पहचान क्या है? भोगोंमें रत रहते हुये भी साधकमें भोगबुद्धि नहीं है, इसके क्या लक्षण हैं? भोगबुद्धिसे सावधान रहनेका क्या विधि-विधान (line of action) है?
सविनय,
साधक

========================================



-----------------------------------------------------------------------

www.swamirasukhdasji.org   -  HINDI 



__._,_.___

Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
Reply via web post Reply to sender Reply to group Start a New Topic Messages in this topic (1)
All past 4925+ messages are accessible and searchable at http://groups.yahoo.com/group/gita-talk/

28,000+ sadhakas

A list of all topics discussed in 2009 along with their links are at http://groups.yahoo.com/group/gita-talk/message/3189

.

__,_._,___

No comments: