Monday, October 12, 2015

[gita-talk] मेरी आत्मा तेरी आत् मा इसकी आत्मा उसकी आत् मा

 

कहा है : भगवान् कहते हैं कि मैं ही सबका आत्मा हूँ'अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः ।'
परमात्मा तो एक ही थे, एक ही हैं, एक ही रहेंगे जो सबका आत्मा हैं फिर यह मेरी आत्मा, तेरी आत्मा, इसकी आत्मा, उसकी आत्मा क्या है? मानो जितने प्राणी हैं उतनी ही आत्मा हैं। वस्तुत: कितनी आत्मा हैं? आत्मा एक है या अनेक?
कृपया समझाइये। 
सविनय,
साधक 

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परमात्मा एक, आत्माएं अनेक हैं। परमात्मा हम आत्माओं के पारलौकिक पिता हैं। परमात्मा ही सतगुरु हैं। शिव परमात्मा है ~ अजन्मा, पतित पावन,  सर्वशक्तिवान, सर्वज्ञता, सुख करता दुःख हरता, मंगल करता हैं।
शुभकामना, ॐ शान्ति

jhun sanjay

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आत्मा एक ही है, सकल विश्वमें व्याप्त है।
अजो नित्य: शाश्वतोङयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे   २/२०
इस श्लोकमें आत्माको अयं एक वचनसे दर्शाया गया है - यानि आत्मा एक ही है

अच्छेद्योङयमदाह्योङयमक्लेद्योङशाोष्य एव च
नित्य: सर्वगत: स्थाणुरचलोङयं सनातन:   २/२४

इस श्लोकमें भी उसे नित्य: - eternal, सर्वगत: - all pervading  स्थाणु: - stable, अचल - unmovable  एवं सनातन: - ancient बताया है। ये सारे गुण एकवचनी आत्माके बताये हैं। 

अात्मा एक ही है, शरीर अलग अलग है, मेरा शरीर, तेरा शरीर, उसका शरीर कह सकते हैं लेकिन आत्मा सबकी एक ही है परस्पर जुडी हुई है। 

जय श्रीकृष्ण   

bhaskar_joshi 

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 Dear Sadhakjee,
            It is correct that Bhagavaan is ONE. His आत्मा is परमात्मा. All the entities in the Universe have within them, जीवात्मा. जीवात्मा is अंश of परमात्मा. That is why every entity has some Divinity in the form of this अंश.
           With regards,
           ------Mukund Apte   

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