Monday, October 5, 2015

[gita-talk] एक ही है या अनेक हैं?

 



परमात्मा किसे कहा गया है? 
ब्रह्म किसे कहा गया है? 
परमात्मामें ब्रह्म है या ब्रह्ममें परमात्मा है?
कहा है : परमात्मा ही था, परमात्मा ही है, परमात्मा ही रहेगा। परमात्माके सिवा न कभी कुछ था, न अभी है, न कभी होगा और न ही कभी हो सकता ही है।  
बहुत सुनते आये हैं : अहं ब्रह्मास्मि। 
परमात्माके रहते यह ब्रह्म कहाँसे आ टपका?
परमात्माके रहते (यह अलगसे) ब्रह्मको माननेकी जरूरत ही क्या है? 
क्यों सीधी-सरल बात (परमात्मा है) को एक ब्रह्म लाकर इतना उलझाया गया है?
कृपया समझाइयेगा। 
सविनय,
साधक 

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There is "atma". Ultimately, there is only One. But we see division. So, we use term "paramatma" to denote that One Absolute. 

Same way, there is brahma which denotes atma and also, all pervading substance in illusory inert matter. Then, there is "parambrahma" which denotes that one Absolute.

When illusion goes away, then you will realize that atma, paramatma, brahma, and parambrahma are One and the same. 

g a mittal

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हरि ॐ

सविनयजी महाराज - जैसे परमात्मा के रहते आप टपक गये ना, वैसे  ही परमात्मा के रहते ब्रह्म टपक गया जी !!!

जय श्री कृष्ण 

व्यास एन बी 

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Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
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