Thursday, October 29, 2015

[gita-talk] Understanding of Gita Chapter 2/16

 

Shree Hari 

This brings closure to this topic.    Gita Talk Moderators,   Ram Ram 

----------------------------------------------------
गीता 2 : 16 के संदर्भमे ं समझना है

साधक-संजीवनीके पृष्ठ 67 पर लिखा है : जब तक असत् की सत्ता है, तब तक विवेक है। 
साधक-संजीवनीके पृष्ठ 64 पर लिखा है : असत् की सत्ता नहीं है। 
असत् की सत्ता नहीं होने (पृष्ठ 64) पर भी जब तक असत् की सत्ता है, तब तक विवेक है (पृष्ठ 67) कहना अवश्य कुछ गूढ़ बात है। 
उसमें निहित गूढ़ताको समझानेकी कृपा करें। 
सविनय,
साधक


---------------------------------------------



RAM  RAM

Bhai Vivek ki baat tabhi tak hei jab tak aap Asat ko satta de rahe hein. Bas itni si baat hei. Gudta ye hei ki satt aap swayam hei aur uske liye kisi vivek ki zarurat nahi.

VIJAY MONGA

-----------------------------------------------------------------


बड़े भैया, लगता है यहाँ मुद्रण त्रुटि हो गयी है। 
यदि यह लिखा होता कि जब तक असत् की मानी हुई सत्ता है, तब तक ही विवेक है। तो क्या प्रश्न पूछा जाता? निश्चितरूपसे नहीं पूछा जाता। 
अस्तु। 
गीता-वार्ता महोदयसे निवेदन है कि सूत्रका समापन करें। प्रश्न नासमझीमें हो गया। 
सविनय,
साधक

---------------------------------------------


हरि शरणम ! 
कोई इस ( जगत ) को सत्य कहता  तो कोई झूठा कहता तो कोई इसे सत्य और झूठा दोनों मानता ! लेकिन तुलसीदासजी के अनुसार ये  तीनों (मान्यताएं / सिद्धांत ) भ्रम हैं जिनका परित्याग करके (और इसे प्रभु की लीला समझकर अर्थात लोकवत्तुलीला कैवल्यं ) ही अपने परम को पहचाना / जाना जा सकता है !

कोउ कह सत्य, झूठ कह कोऊ, जुगल प्रबल कोउ मानै !
तुलसिदास परिहरै तीन भ्रम, सो आपन पहिचानै !! ( विनय पत्रिका - 111 )
नीतीश दूबे

------------------------------------------------------

  • हरि ओम

    सविनयजी महाराज ! गूढता  मात्र  इतनी है कि असत् की सत्ता वास्तवमें है नहीं पर आपने "मान रखी" है ! अब कोई चीज़ है नहीं पर आपने मान ली तो हो गई , बिना वास्तवमें होते हुए भी हो गयी - क्योंकि आप सत्य-संकल्प है, जो धारणा बना लेंगे वह नहीं होते हुए भी आपका अनुभव बन जायेगी ! अत: जब तक असत् की सत्ता आपने "मान रखी है" ( जैसे रस्सी को साँप मान लेते हैं) तब तक "विवेक" की ज़रूरत है ! जहाँ आपने असत् की सत्ता को माना ही नहीं - वहाँ विवेक समाप्त हो जायेगा और तत्व ज्ञान में परिणत हो जायगा ! जब असत् है ही नहीं तो फिर विवेक क्या करेगा ? विवेक वहाँ काम आता है जहाँ दूसरी सत्ता हो - जहाँ "संख्या" ( सांख्य योग) हो - जहाँ सत् ही सत् हो वहाँ विवेक का कोई काम नहीं रहता ।

    जय श्री कृष्णा

    व्यास एन बी

------------------------------------------------------


हरि शरणम!
आदरणीय साधक जी, विवेक के बारे में पृष्ठ संख्या 869 और 871 पर भी ध्यान देना चाहिए जहां यह लिखा हुआ है की "विवेक भी अनादि है " ! इसके बाद गूढता का प्रश्न होना चाहिए था ! लेकिन , पूज्य स्वामीजी पृष्ठ संख्या 871 पर ही इसका ज्ञान और भक्ति के दृष्टि में दे रखे हैं !
नीतीश दूबे





======================================




HINDI:            http://www.swamiramsukhdasji.org




__._,_.___

Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
Reply via web post Reply to sender Reply to group Start a New Topic Messages in this topic (3)
All past 4925+ messages are accessible and searchable at http://groups.yahoo.com/group/gita-talk/

28,000+ sadhakas

A list of all topics discussed in 2009 along with their links are at http://groups.yahoo.com/group/gita-talk/message/3189

.

__,_._,___

No comments: