Monday, September 28, 2015

[gita-talk] अवतार

 



संसारको उसका (परमात्माका) आदि अवतार कहा गया है। आदिका शब्दार्थ लें तो 
संसार उसका (परमात्माका) पहला अवतार हुआ। इस चतुर्युगमें कुल तेईस अवतार 
बताये गये हैं जिनमें संसार पहला अवतार है जो अभी भी है (विलुप्त नहीं हुआ है),
जबकि शेष बाईस अवतारोंमेंसे एक भी (आज) नजर नहीं आता। क्या यह अटपटा 
नहीं लगता कि आदि अवतार तो विद्यमान है और उसके बादके सभी अवतार पूरी 
तरह विलुप्त हैं? यदि विलुप्त नहीं हैं तो नजर क्यों नहीं आते? यदि विलुप्त हैं तो 
क्या वे सभी (जिनमें सर्वश्री राम, कृष्ण, बुद्ध आदि भी गिने गये हैं) इस संसारसे 
(आदि अवतार) किसी तरह कमजोर थे जो उन्हें (अगला अवतार होनेके पहले ही)
विलुप्त होना पड़ा? किन्हीं दो अवतारोंके (प्राणी रूपमें) समकालीन होनेका वर्णन 
साधकको ज्ञात नहीं है। 
कृपया समाधान दें। 
सविनय,
साधक  

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हरि शरणम् ,
क्या पता अवतार का नजर न आना अपनी ही दृष्तिदोष हो ? जो कालातीत और कालाधीश है, उसको कोइ भी काल / युग कैसे बाध / मना कर सकता है ?  इस कलियुग में ही बहुतों ( तुलसी, सूर , मीराबाई ,  महाप्रभु , ...) ने अवतार को उसी रूप में  देखे हैं और देख रहे होंगे | 

हरि व्यापक सर्वत्र समाना | प्रेम ते प्रकट होइ मै जाना || (रामचरित मानस / बालकाण्ड )
भक्त्या तु अनन्य शक्य अहम एवं विधोर्जुन | ज्ञातुं द्रष्टुं च तत्त्वेन प्रवेष्टुं च परन्तप || ( भगवद्गीता - 11/54 )
अर्थात , भगवान को प्रकट करने और देखने में एक ही शर्त है और वह् है "प्रेम / परा भक्ति ".

इतना ही नहीं, हम लोग उस सत्युग , त्रेता और द्वापर में अवतार के समय होते हुये भी अपनी दृष्टिदोष के वजह से उन्हे नहीं देख सके | इसलिये अवतार से ज्यादा अवतार को देखने की दृष्टि महत्वपुर्ण है | हम यह कैसे कह सकते हैं , इस समय उसकी ज्यादे जरुरत है और वह अपना कार्य (चाहे जिस भी रूप में ) नहीं कर रहा है |  

नीतीश दूबे 

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अश्वत्थामाबलिर्व्यासोहनुमांश्च विभीषण:कृपश्चपरशुरामश्च सप्तैतेचिरंजीविन:।
Ashwathaama Balirvyaaso Hanumanshach
Vibhishanha Krupascha Parshuramascha
Saptaitey Chiranjivinaha
Ashwathaama, Bali, Vyas, Hanuman, Vibhishan, Kripacharya and Parashuram are seven people with long life (chiranjivi) who will stay on earth till the end of Kali-yuga. They are still existing on earth.

In Valmiki Ramaya, Lord Ram asked Hanuman to stay on earth until glories of Ram are sung on earth.  Madhvacharya met Vyasa Deva and Vyas Deva supposed to be on earth too. In Bhagavatam, it is said that Bali became king of lower plenatary systems and he will become next Indra (king of Swarga loka) after this manvantara.

What is vastavikta? That is what you have asked. What I know is that I am God's and God is mine. Everyone is ultimately avatar of God. It is said in Bhagavatam (1/3/26 onwards) ---

O brāhmaṇas, the incarnations of the Lord are innumerable, like rivulets flowing from inexhaustible sources of water. All the rishis, Manus, Devatas and descendants of Manu, who are especially powerful, are plenary portions or portions of the plenary portions of the Lord. This also includes the Prajāpatis.

Gosvami Tulsidasji states:

मैं सेवक सचराचर रुप स्वामी भगवंत  ||
and
जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि ।
बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि ॥

Vasudeva Sarvam - See God in all. You won't need any avatar because He is already there everywhere and in everyone.

भगवान सब जगह हैं, सबमे हैं, सबके हैं और सब समय हैं |



g a mittal

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  • >>  
    भगवान् ने निश्चित रूपसे स्वयंसे नहीं कहे अन्यथा All of you (स्वयंसे अतिरिक्त अन्यको you संबोधित किया जाता है, स्वयंको you नहीं कहा जाता कभी) शब्द नहीं कहते।

    yes, it is confusing. We see duality in this world - I (others), world and God. But Gita and other scriptures state that there is only Paramatma and there is nothing else besides Him.

    For those people who can't accept this oneness, they can accept God, self and world. For these people, Gita states that God is in self and world. Self (and world) belongs to God.

    You can read Chapter 7 of Sadhak-Sanjivini and it can help you resolve some of these doubts. 
g a mittal

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  • श्री g a mittal जी! 
    कथन 
    Hanumanji is supposed to be on earth. Same way, I think Vyas deva is supposed to be there also. में supposed to be on earth और think … is supposed to be there also संशयसे 
    परिपूर्ण हैं। इनमें निश्चितता प्रकट नहीं होती। कृपया समझाइयेगा कि वास्तविकता क्या है?
    कलियुगमें नाम लेनेमात्रसे कल्याण होगा, यह साधकके प्रश्न (
    त्रेता और द्वापर युगोंमें रहनेवाले अवतार परशुराम इस 
    कलियुगमें क्यों नहीं हैं जबकि इसी युगमें उनकी बहुत जरूरत है?) 
    का उत्तर नहीं कहा जा सकता। 
    अस्तु,


    सविनय,
    साधक 
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यदि पता नहीं होनेको भूलना कहते हैं तो बात अलग है। 
सविनय,
साधक 

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sayon kk जी! 
आपकी बात पढ़ी। त्रेता और द्वापर युगोंमें रहनेवाले अवतार परशुराम इस 
कलियुगमें क्यों नहीं हैं जबकि इसी युगमें उनकी बहुत जरूरत है?
किसी ग्रंथमें इसका उत्तर हो तो कृपया अवश्य बतायें। 


सविनय,
साधक 

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>> संसारको उसका (परमात्माका) आदि अवतार कहा गया है। 

Please understand above statement as described in Bhagavatam 11/13/24. "Within this world, whatever is perceived by the mind, speech, eyes or other senses is Me alone and nothing besides Me. All of you please understand this by a straightforward analysis of the facts."

>> इस चतुर्युगमें कुल तेईस अवतार बताये गये हैं जिनमें संसार पहला अवतार है जो अभी भी है (विलुप्त नहीं हुआ है),

I think you should read Bhagavatam and get facts from Bhagavatam. Please especially read 3rd chapter of 1st canto.

>>  किन्हीं दो अवतारोंके (प्राणी रूपमें) समकालीन होनेका वर्णन  साधकको ज्ञात नहीं है। 

Ram and Parashuram were at the same time.

Bhagavatam 1.3.8 describes Narada as avatar. He is supposed to be still existing. He does not have human form. He is son of Brahma and part of Brahma-loka.

Bhagavatam 1.3.21 describes Veda Vyas as avatar. He is supposed to be still existing in Himalayas.

Please read Bhagavatam to resolve your doubts.


g a mittal

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आप क्यों भगवान परशुराम और श्री राम को भूल गए? भगवान परशुराम और श्री कृष्ण को भूल गए? 

sayon kk

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HINDI:            http://www.swamiramsukhdasji.org







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Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
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