Wednesday, September 16, 2015

[gita-talk] क्रिया करना और उसका फल (क्रियाका होना) तात् कालिक होते हैं

 

किसी प्रश्नके उत्तरमें भैया कुलदीप जी ने गीता अध्याय दूसरा श्लोक सैंतालीसवाँ के संदर्भमें बताया : 
He should also keep in mind that achieving AIM (FAL) in not in His hands but performing proper action is!
साधक 
but performing proper action is 
से असहमत है। यदि 
proper action 
करना किसीके भी हाथमें होता तो हर कोई सदा 
proper action 
ही करता (im
proper action
 कभी करता ही नहीं) और तब यह कभी नहीं कहा जाता कि 
proper action 
नहीं किया। 
भैया, किसी भी क्रिया का होना, उस क्रियाको करनेका फल होता है। क्रिया करने और क्रिया होनेमें कालका भेद नहीं होता। 
इसे ऐसे समझिये : कर्णने अर्जुनको मारनेकी कोई क्रिया नहीं की जिसके फलस्वरूप अर्जुनके मरनेकी क्रिया नहीं हुई। अर्जुनने कर्णके मारनेकी क्रिया की जिसके फलस्वरूप कर्णके मरनेकी क्रिया हुई। 
cause (क्रिया करना) और effect (क्रिया होना) तात्कालिक घटनायें हैं, इनमें कालका भेद नहीं हो सकता। 
गीता अध्याय दूसरा के श्लोक सैंतालीसवें में जिस फल की बात की गयी है वह फल (क्रियाका होना) किसीके हाथमें नहीं है क्योंकि वह एक निश्चित विधानके अनुसार तात्कालिक घटित होता है। 
कोई एक उदाहरण दीजिये जिसमें करना (क्रिया करना) और होना (क्रिया होना) में कालका भेद हो (आगे-पीछे होती हों)। 
सविनय,
साधक 

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Ram Ram 

In future please keep the questions short.   
 
GitaTalk Moderators,   Ram Ram

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Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
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