Friday, August 21, 2015

[gita-talk] ''भगवानको याद करना'' का अर्थ समझना है

 

''भगवानको याद करना'' का  अर्थ समझना है
कहा है : पृथ्वीजलतेज आदि तत्त्वोंमेंचन्द्रसूर्य आदि रूपोंमेंसात्त्विकराजस और तामस भावक्रिया आदिमें भगवान् ही परिपूर्ण हैं । ब्रह्मजीवक्रियासंसारब्रह्मा और विष्णुरूपसे भगवान् ही है । इस तरह तत्त्वसे सब कुछ भगवान्-ही-भगवान् है ।
आगे कहा है : जो अन्तसमयमें भगवान्का चिन्तन करता हुआ शरीर छोड़ता हैवह भगवान्को ही प्राप्त होता है । उसका फिर जन्म-मरण नहीं होता । अतः मनुष्यको सब समयमेंसभी अवस्थाओंमें और शास्त्रविहित सब काम करते हुए भगवान्को याद रखना चाहियेजिससे अन्तसमयमें भगवान् ही याद आयें ।
साधकको जिज्ञासा है कि जब तत्त्वसे सब कुछ भगवान-ही-भगवान हैं तो अंतसमयमें ही क्या, किसी भी समय मनुष्य ही क्या कोई भी प्राणी, जो भी चिंतन करेगा (याद करेगा) वह भगवानके अतिरिक्त होगा ही क्या और भगवानके अतिरिक्त हो भी सकता है क्या? यदि हो सकता है तो उपरोक्त दोनों कथनका मर्म क्या है?
कृपया स्पष्ट उदाहरणसहित (कि यह याद करना तो भगवानको याद करना है और यह याद करना भगवानको याद करना नहीं है) समझानेकी कृपा करें।सविनय,
साधक 

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हरि शरणम् 
जब तक किसी को भगवान, समय और चिन्तन अलग-अलग प्रतीत  हो रहा है , उसके लिये तत्त्व एक होने पर भी उसका चिन्तन भगवान से अलग कल्पित है |  इसलिये उसको हर पल भगवान को याद / चिन्तन की सलाह दी जाती है जिससे वह , उसका चिन्तन और उसका समय भगवदमय होकर सिर्फ़् भगवान और उनकी अपनी लीला रह जाय जो कि तत्त्वतः ऐसा ही है |
आपका 
नीतीश दूबे 

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Swami Ramsukhdas states in Appendix of 8.14 in Sadhak Sanjivini --

"ananyacetah" - When a devotee holds that there is no other entity besides God, then how will his mind wander? Why will it wander? Where will it wander? Therefore, he naturally becomes "ananyacetah" viz, he whose mind is undivided and who depends only on God - 'satatam yo mam smarati nityasah' -- one is 'to do' and the other is 'to take place'. What is done is action and whatever takes place is remembrance. As at the end of Gita, Arjuna said 'smriti-labdha 18/73', memory is not an action but it is remembrance of one's eternal relationship (intimacy) of God. The 'sense of mine' with God is the main factor for His memory. God is mine and He is for me - by this mineness, love (devotion) for God naturally develops and when we love, He is naturally and constantly remembered by us. Therefore at the beginning of the seventh chapter by the expression 'mayasakta-manah' the Lord has mentioned to get attached to Him viz to love Him. It means that the striver regards only God as his and for him, He becomes loving to him. When this lovingness is developed, God is naturally remembered.

>> किसी भी समय मनुष्य ही क्या कोई भी प्राणी, जो भी चिंतन करेगा (याद करेगा) वह भगवानके अतिरिक्त होगा ही क्या और भगवानके अतिरिक्त हो भी सकता है क्या?

Person holds that there is no other entity besides God will only think of God. He will also see others only thinking of God.

Those who don't see (or accept) God's presence in all have to externally try to remember Him. After many births they come to understanding of vasudeva sarvam and then, true remembrance happens.  (Gita 7/19)

>> जो अन्तसमयमें भगवान्का चिन्तन करता हुआ शरीर छोड़ता हैवह भगवान्को ही प्राप्त होता है । 

This applies to those who don't hold vision there is no other entity besides God. But Swami states in next sentence that such state is only possible for those who hold vision there is no other entity besides God. 

>> अतः मनुष्यको सब समयमेंसभी अवस्थाओंमें और शास्त्रविहित सब काम करते हुए भगवान्को याद रखना चाहियेजिससे अन्तसमयमें भगवान् ही याद आयें ।

This is only possible for one who holds that there is no other entity besides God.

g a mittal

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हरि ओम

एक तो जो "स्वत : सिद्ध"  है , और एक जो आप "मानते" हो - दूसरे शब्दों में एक जो "है" और एक जो आप "मानते" हो - रस्सी "है" ..साँप "मानतेप" हो - महाराज - जो आप "मानते" कहो, वही "अनुभव" बनेगा , न कि जो आप "जानते" हो या जो "स्वत: सिद्ध" है !!!!

जय श्री कृष्णा

व्यास एन बी

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Hello,

I remembering God all the time means "thinking divine" which can be 
done all the no matter what you may doing physically. In Bhagwat
Gita, God Krishna "orders" Arjun when he was ready o shoot his 
arrow, to do what he was doing but keep God Krishna in your his mind, all the
time.

Good Luck!

Notesav 

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Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
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