Tuesday, August 4, 2015

[gita-talk] Please clarify - दीखनेवाला मिलता नहीं और जो मिला है, वह टिकता नहीं

 

Swamiji says - जो दीखता है और जो मिला हुआ हैइसके आधारपर हम नहीं रह सकते । कारण कि दीखनेवाला मिलता नहीं और जो मिला है, वह टिकता नहीं ।   (from Satcharcha post) 

Not clear why -   दीखनेवाला मिलता नहीं ?   Surely we see something and aspire to acquire that thing and often get it.  So what does Swamiji mean ?   

Bina GK 

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Bina GK जी !
स्वामीजीके कथन ''जो दीखता है और जो मिला हुआ है … " में ''मिला हुआ'' को ''दीखता है'' के साथ जोड़कर देखनेसे सब साफ हो जाता है क्योंकि यह संसार मिला हुआ दीखता तो है किन्तु वस्तुत: मिला हुआ होता नहीं और न ही कभी हो सकता ही है कारण जानेवालेको (रहनेवालेको नहीं) ही संसार संज्ञा दी गयी है।
साधकने दीखनेवाला मिलता नहीं और जो मिला है, वह टिकता नहीं  को पढ़ा दीखनेवाला मिलता नहीं और जो मिला हुआ दीखता है, वह टिकता नहीं   
अस्तु। 
सविनय,
साधक 

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Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
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