Sunday, July 19, 2015

[gita-talk] सबके किस सुखसे सुखी होनेकी बात कही गयी है?

 


समझना है
प्रार्थना 'सर्वे भवन्तु सुखिन: … … ' में सबके किस सुखसे सुखी होनेकी बात कही गयी है?
कहा है : कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग आदि सबमें सुखभोग बाधक है। साधक जहाँ सुख लेता है, वहीं अटक जाता है -- यह सार बात है। 
जब सुखभोग इतना घातक अटकाव उपस्थित कर देता है तो सबके सुखी होनेकी प्रार्थना करनेका प्रयोजन ही क्या?
कृपया समझायें। 
सविनय,
साधक 

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Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
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