Friday, January 2, 2015

[gita-talk] परमात्मा और परमात्माकी सत्ता, परमात्मतत्त्व, सत्ता, 'है'-पना आदि

 


प्रश्न 'सबमें परमात्माको कैसे देखें?' का उत्तर देते समय कहा है : 
'मनुष्य है' -- इसमें जो 'है'-पना है, सत्ता है, वह कभी मिटती नहीं। 
आगे कहा है : वह सत्ता परमात्माकी है। 
यह भी कहा है : सबमें एक परमात्मतत्त्वकी सत्ता है। 
और यह भी कहा है : साधककी दृष्टि परमात्मतत्त्वपर ही होती है सबमें जो परमात्मा है, उसीको प्राप्त करना है, … 
बताना यह है कि शब्द 'परमात्मा' को पढ़ते (या सुनते) ही (मन-बुद्धिमें) एक (या अनेक) अवतार-रूप चित्रित होता है, 
जबकि शब्द 'है'-पना, या 'सत्ता', या 'परमात्माकी सत्ता', या 'परमात्मतत्त्व' को पढ़ते (या सुनते) ऐसा कुछ भी नहीं होता 
अपितु भीतरमें एक अनिर्वचनीय अनुभूतिसी होती है जिसे शब्दोंमें बताना नहीं बनता
प्रश्न यह है : क्या [ 'है'-पना, सत्ता, परमात्मतत्त्व, परमात्माकी सत्ता आदि ] और 'परमात्मा' भिन्न हैं?
यदि भिन्न नहीं हैं तो शब्दों 'है'-पना, या 'सत्ता', या 'परमात्माकी सत्ता', या 'परमात्मतत्त्व' को और शब्द 'परमात्मा' को 
पढ़ने (या सुनने) से एक समान अनुभूति क्यों नहीं हो रही? साधकसे भूल या चूक या गलती कहाँ हो रही है?
कृपया समझायें।  
सविनय,
साधक  

======================

ENGLISH:  www.swamiramsukhdasji.net
HINDI:   www.swamiramsukhdasji.org

__._,_.___

Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
Reply via web post Reply to sender Reply to group Start a New Topic Messages in this topic (1)
All past 4925+ messages are accessible and searchable at http://groups.yahoo.com/group/gita-talk/

28,000+ sadhakas

A list of all topics discussed in 2009 along with their links are at http://groups.yahoo.com/group/gita-talk/message/3189

.

__,_._,___

No comments: