Monday, December 8, 2014

[gita-talk] Me, My Swaroop (Self, Aatma), Would like to Understand

 

It has been said :   The "Self" (swaroop) of all being's is conscious existence (IS) only. 
Further it is said :   Our Self is not attached to any body,  the Self is not limited to any one body,  rather it is all pervasive.  
Elsewhere it is said :  Our Self (aatma)  and Paramatma (IS) are of the same element, reality (tattva).   
Question is :    That which is called the embodied soul (jeev),  if is it only called "jeev" due to the body, and the Self (Swaroop,  Aatma) which is not attached to any body,  that "Swaroop"  (Aatma,  Self) is not limited to any body,  then, the "Self"  (swaroop) of all the embodied souls (jeevs) who have assumed this body,   is in reality (tattva) one only or many?  When the Self (swaroop, aatma) and Paramatma (Is) are both of the same essence (reality,  tattva),  then the question of the swaroop (self, aatma) being many (various separate entities)  does not arise,  because Paramatma (IS),  was only One,  is One and will remain One.  What is the truth,  Please explain.  
Humbly,  
Sadhak

HINDI



कहा है : जीवमात्रका स्वरूप चिन्मय सत्तामात्र है। 
आगे कहा है : हमारा स्वरूप किसी शरीरसे लिप्त नहीं है, स्वरूप एक शरीरमें सीमित नहीं है, प्रत्युत सर्वव्यापी है।
अन्यत्र कहा है : हमारा स्वरूप (आत्मा) और परमात्मा (है) दोनों एक ही तत्त्व हैं। 
जिज्ञासा है : जिसे जीव कहा गया है, यदि उसे शरीरोंको लेकर ही कहा गया है और स्वरूप (आत्मा) किसी भी शरीरसे 
लिप्त नहीं है, स्वरूप (आत्मा) किसी भी शरीरमें सीमित नहीं है, तो सभी शरीरधारी जीवोंका स्वरूप (आत्मा) भी 
तत्त्वसे एक ही होता है या अनेक (अलग-अलग)? जब स्वरूप (आत्मा) और परमात्मा (है) दोनों एक ही तत्त्व हैं तो 
स्वरूप (आत्मा) के अनेक (अलग-अलग) होनेका प्रश्न ही नहीं क्योंकि परमात्मा (है) तो एक ही था, एक ही है और 
एक ही रहेगा। सच क्या है, समझना है। 
सविनय,
साधक 

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Dear sadaks,
Any animal and human are made out of Jada Vastu (Destructive matter/element). In all these is Paramathuma as one power source. Like a battery can be put in torch light, same battery in toys etc. The power generated by any battery is same called DC supply (Direct Current supply. Here the battery is Jeeva and power within jeeva is Paramathuma. There is power in any matter like water, rock, air etc.
B.Sathyanarayan. Chennai

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Due to illusion (or ignorance), it appears that swaroop (self, aatma) has become many. Ultimately, only Vasudeva exists.

G A Mittal

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हरि ओम

आपके प्रश्न के पहले दो वाक्य  ही आपका उत्तर हैं !  आपने "जिज्ञासा" की शुरूआत यह कह के की कि " जिसे जीव कहा गया है, "यदि " शरीरों को लेकर  ही कह गया है ...." , तो साधकजी यह जो "यदि" है ना, यह केवल आपकी बुद्धि में ही है ।  मूल बात जो आपने स्वामीजी या शास्त्रों से उद्धृत की है, वहाँ इस "यदि" का प्रश्न ही नहीं उठता । प्रश्न तब उठता जब केवल "जीव" शब्द का स्वामीजी प्रयोग करते - यहाँ "जीव" नहीं, "जीवमात्र के स्वरूप" की बात है - जहाँ "स्वरूप" की बात आती है, वहाँ "शरीर" के साथ जीव को जोड़ने की संभावना ही समाप्त हो जाती है ! "यदि" का प्रश्न ही नहीं उठता । आप ही प्रश्न अपनी तरफ़ से घड़ रहे हैं, आप ही तोड़ रहे हैं । आपको प्रश्न घड़ना था, घड़ दिया । मोडरेटर्स को पोस्ट करना था, कर दिया । अब बुआजी के मूँछें हों तब उसे चाचा कहेंगे - मूँछें तो है ही नहीं ! 

जय श्री कृष्णा

व्यास एन बी 

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Hindi -  www.swamiramsukhdasji.org
 




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Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
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