Tuesday, December 16, 2014

[gita-talk] HINDI - 'कष्ट', 'पीड़ा' और 'दुःख' शब्दोंका अंतर और इनका अनुभव करानेवाला (कर्ता) एवं अनुभव करनेवाला (भोक्ता) समझना है

 




कृपया सरल उदाहरण देकर शब्दों 'कष्ट', 'पीड़ा' और 'दुःख' में अंतर समझायें। 
स्थूल शरीर, मन, बुद्धि, अह्म और स्वयं (आत्मा) के सन्दर्भमें बतायें कि कष्ट, पीड़ा  
और दुःख का अनुभव करानेवाला (कर्ता) और अनुभव करनेवाला (भोक्ता) कौन होता है?
सविनय,
साधक 

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हरि ओम

"कष्ट" मामूली असुविधा को कहा जाता है ! जीवन में कुछ पाने के लिये जो कठिन प्रयास किसे जाते हैं , उसे कष्ट कहा जाता है । साधक के लिये इसका अर्थ या अन्तर बुद्धि की खुजली मिटाने के अलावा और कोई महत्व नहीं रखता । "पीड़ा" - शब्द शरीर की पीड़ा से जोड़ा जाता है - शरीर में " पीड़ा" होने के बावजूद भी दु:ख का अनुभव हो- यह आवश्यक नहीं है ! पीड़ा शरीर को होती है, दु:ख स्वयं को होता है ! 

ह्रदय की जलन और संताप - "दु:ख " कहलाता है ! 

जो कर्ता होता है, वही भोक्ता बनता है ! जीव अपने आप को कर्ता मान लेता है, अत: वही भोक्ता बनता है ! दु:ख का अनुभव - जीव "स्वयं" करता है ! जड़ मन, बुद्धि, शरीर दु:ख का अनुभव नहीं करते - क्योंकि वे "जड़" हैं ! "चेतन" तत्त्व ही, "अनुभव" करने में सक्षम होता है, जड़ तत्त्व नहीं ! 

जय श्री कृष्णा

व्यास एन बी 

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kasht, peeeda, dukh aur sthool shareer, man buddhi, aham, atma kasht, peeda, dukh sabhi shareer ko hota hai man ko nahi, jabhi hum apna dhayn shareer kay taraf le jate hai jabhi sthool shareer se hatkar dhyan param atma ke pass le jayenge thoughtless ness ki man may koi chinta nahi shant hai kahan mile theek hai, kapada mile theek hai jhopadi me soye theek koi bahari vastu na mile theek hai rishi muni logon ko 1000 saal pehle koi suvidha nahi tha phir bhi anand rah they kyonki man santushth hai, jab man santhusht rehta hai rukhi sookhi khana bhi swadisht rehta hai jab man may ashant ke toofan utha hai badiya paramanna bhi phiki lagata hai isliye dhyan, jap, tap, pooja, path, prabhu ke gun gate rehne se dwandwa ka anubhav nehi hota hai jitna ho sake bataya hoo my utn gnani nahi jaise my kush rehta hoo mera anubhav se bataya hoo santusht nahi to kshama karna bhagwan bhala kare Swami Krishnananda,  bangalore



Hindi :       www.swamiramsukhdasji.org
 





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Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
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