Tuesday, October 14, 2014

[gita-talk] One or Infinite Aatmas in Us ? Please Enlighten.

 

Swamiji says :   Your Aatma (soul) is all pervading,  then even in a dog is your Aatma.   It is a sadhak's question :   the dog's aatma (soul) [if it exists] it too is all pervading,  then even in us is a dog's aatma (soul).   Then either there are infinite aatmas in us,  or there is one aatma which is present in all (infinite)  beings (jeevs).   In fact what is the truth ?    Can some sadhak (all a siddha)  shed some light on this ?  Humbly speaking
 
HINDI     
स्वामीजीने कहा है : आपकी आत्मा सर्वव्यापी है तो कुत्तेमें भी आपकी आत्मा है।साधकका प्रश्न है : कुत्तेकी आत्मा (यदि होती है)
भी तो सर्वव्यापी है तो हममें भीकुत्तेकी आत्मा है। फिर या तो हममें अनंत आत्मायें हैं, या फिर केवल एक आत्माहै जो सभी (अनंत)जीवोंमें
व्याप्त है।वास्तविक सत्य क्या है? क्याइसपर कोईसाधक (या सिद्ध)प्रकाश डालेगा?सविनय, 
 
साधक
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हरि ओम

वास्तविक सत्य वही है जो स्वामीजी ने कहा है ! ये जो स्वामीजी की बातें आप उद्धृत करते हैं, यह अटल सत्य हैं, और आपको " वासुदेव सर्वम्" की तरफ़ इंगित करती हैं ! आप ये जो अपनी बुद्धि से इसको समझने का प्रयत्न करते हैं, यह कोई बहुत लाभदायक तरीक़ा नहीं है ! आप विश्वास करना सीखें ! जब स्वामीजी ने कोई बात कही है तो मान लीजिये ! यह बुद्धि का विषय ही नहीं है, क्यों फिर आप मान नहीं लेते ? क्या " तो हममें भी कुत्ते की आत्मा है" ? आप सबसे पहले स्वाध्याय करें, साधक संजीवनी पढें ! आपके मन में जो भी बात आये, उसे पूछने की बजाय स्वाध्याय करें ! "आपकी" आत्मा, "मेरी" आत्मा, "कुत्ते" की आत्मा - सब एक हैं - एक ही तत्व है जोविभिन्न रूपों में भास रहा है ! विभिन्न रूपों में भासने का कारण आपकी "मान्यता" है - आपकी "स्वीकृति" है ! अब जब तक आप "कुत्ते की आत्मा" , "मेरी आत्मा", अनन्त आत्मायें , आदि यहमान्यता रख कर अपनी बुद्धि से समझने का प्रयत्न करेंगे तो आपको कुछ हासिल नहीं होगा, उल्टा कुत्ते की आत्मा आदि उदाहरण देकर आप हास्यास्पद बनेंगे ! यहाँ शब्द कुत्ता, गधा आदि महत्वपूर्ण नहीं है, केवल एक ही परमात्मा ( परम+ आत्मा) विभिन्न रूपों में भासता है, यह महत्वपूर्ण है ! मूल में केवल एक ही तत्व है, बाक़ी सब "मान्यता" के कारण "बने हुए" हैं, हैं नहीं ! क्या जँची ? अब इसको आप " मान लें" और आगे बढ जायें तब तो लाभ होगा, और अपनी निरन्तर परिवर्तन शील , तुच्छ बुद्धि लगायें तो लगाते रहो - कुछ हासिल नहीं होगा ! 

स्वामीजी जैसे सनातन धर्म के सन्त की बातें मिलने के बाद, उनकी बातों पर अपनी बुद्धि लगाना , कोई बुद्धिमानी की बात नहीं है ! मान लो - मानना आता है ना ? जब आप इस जन्म के पिता को भी मानते ही हो, जानते नहीं, तो फिर परम+आत्मा, परमपिता को मानने में संकोच क्यों ? क्या लगा रहे हो आप ? अपनी बुद्धि !!! यह बुद्धि अपने कारण प्रकृति को भी नहीं जान सकती तो फिर आत्मा, परमात्मा को कैसे जानेगी ? सोचिये तो सही ! स्वाध्याय कीजिये, विश्वास करना सीखिये ! वरना स्वयं का और दूसरों का समय व्यर्थ करने के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा ! 
जय श्री कृष्णा

व्यास एन बी 
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Dear Sadhakas, Namaskar,

Atma, Soul is a chetana of every biological cell of a life form...the chetana is the Genetic Material
present in every of the trillion trillion cells of the physical body. Genetic Material is Purusha and
body is Prakruti.

Genetic Material is the Shariri and body is Sharir

Gee Waman
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Dear Sir/Madam,

We all have only one ATMA (soul, which lives for ever). We need to keep it happy
by Good Karma (Thinking Divine, 24/7). Not a whole lot else will be enough.

Bye, Good Luck.
 
Notesav
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Swami,
Kindly translate in English
B.Sathya
 
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Hindi :       www.swamiramsukhdasji.org
 
 
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Posted by: Sadhak <sadhak_insight@yahoo.com>
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