Wednesday, June 11, 2014

[gita-talk] God Pervasive - Goes No Where ? Yet God Travels To and Fro ? Please Explain!

 

Shree Hari 

SO FAR WE HAVE NOT SEEN ADEQUATE INTEREST TO START A HINDI GITA-TALK GROUP.   LET US WAIT FOR SOME TIME TO REVISIT THIS ISSUE.

Gita Talk Moderators,  Ram Ram 



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Swamiji says -  God (Supreme Being) is pervasive, immovable, solid, and tightly packed..... however,  not even for a moment God goes anywhere,  where can God go?   There is no space that is empty!  Wherever God goes,  that place is previously occupied by God.  
Aspirant hears references to tales of demi-gods and goddesses going from one place to another, would like to understand what Swamiji has said (just as Lord Vishnu used to travel back and forth on his vehicle Garud.  Lord Ram did not use a vehicle when he went to various places in the forest for 14 years etc.  
Humbly,  Sadhak
HINDI

 स्वामीजीने कहा है : परमात्मा व्यापक हैंअचल हैंठोस हैं सर्वत्र ठसाठस भरे हुए हैं; … … … परन्तु परमात्मा एक क्षण भी कहीं जाते नहींजायें कहाँ कोई खाली जगह हो तो जायें ! जहाँ जायँ, वहाँ पहलेसे ही परमात्मा भरे हुए हैं ।
साधक देवी-देवताओंके एक स्थानसे दूसरे स्थानको जाने-आनेकी कथाओंके संदर्भमें इस कथनको समझना चाहता है [जैसे भगवान विष्णु अपने वाहन गरुड़ पर बैठकर जाते-आते हैं, भगवान राम तो बिना किसी वाहनके चौदह वर्ष वनमें यहाँसे वहाँ आते-जाते हैं, आदि]. 
सविनय,
साधक   


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हरि ओम

तो क्या हुआ, महाराज, क्या एक ही शरीर में ख़ून घूमता नहीं रहता ? एक ही व्यापक, , ठोस आकाश में बादल विचरते नहीं रहते ?क्या बादलों में आकाश नहीं होता ?  हम परमात्मा नामक विराट् शरीर के एक अंश में स्थित हैं । जैसे हमारे शरीर में हर सैल कहीं न कहीं स्थित है, वैसे ही यह समस्त लोक, भुवन, आकाश, पाताल सब उस परमात्मा के छोटे से अंश में स्थित है़ । एक परमात्मा ही है , हम उसी के अंश है । अब आपका प्रश्न है कि शास्त्रों में लिखा है, भगवान् राम वनवास जाते थे, फिर घर आते थे, उठते थे, बैठते थे, शादी करते थे, ससुराल जाते थे - तो कैसे आते जाते थे ? अब ऐसे प्रश्न का क्या उत्तर दें ? और उत्तर देने से हो क्या जायेगा ? फिर भी देता हूँ ! 

जैसे, जो परमात्मा अचल, अखण्ड, ध्रुव, ठोस, व्यापक वग़ैरा है, हम सब उसीके के साक्षात अंश हैं और इसलिये हम सब भी अचल, अखण्ड, ठोस, व्यापक हैं ठीक वैसे ही , जैसे परमात्मा हैं - क्योंकि हम उनके साक्षात् अंश हैं । अब जब हम, ठोस, व्यापक, पूर्ण, अचल, इत्यादि होते हुए कहीं आ सकते हैं, जा सकते हैं, सवाल पूँछ सकते हैं, नाच सकते हैं, कूद सकते हैं, फुदक सकते हैं तो फिर परमात्मा कहीं आयें, जांये , आपको क्या ऐतराज़ है ? ये है उत्तर ! 

जय श्री कृष्णा

व्यास एन बी 

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Lord Vishnu's tales are explained from the perspective of "ASAT". From the perspective of SAT, only paramatma exists and there are no tales of Vishnu or any demigod. 

I think you are having confusion because you are trying to merge the dream reality and the absolute reality together. Dream (or illusion) is separate and different from the awakened (SAT or absolute) state.


Regards,
Murari Das
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